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उत्तरप्रदेशकुशीनगर

व्यक्ति जब मां के पूरे तंत्र का सम्मान करेगा तभी इसका मतलब होगा : प्रो चित्तरंजन मिश्र

बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर के शिक्षा शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित नारीचेतना के विविध आयाम : सशक्तिकरण के संदर्भ में विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी

कुशीनगर । स्त्री के प्रति आदर का विचार व्यवहारिक जीवन की भावना में लाना जरूरी है। विचार जब भावना बनाते हैं तो वह समाजोपयोगी बनते हैं। विचारों का महत्व भाव के साथ जुड़ने में ही है। जो विचार भाव नहीं बनाता है वह बंजर होता है। व्यक्ति जब मां के पूरे तंत्र का सम्मान करेगा तभी इसका मतलब होगा। उक्त बातें प्रोफेसर चित्तरंजन मिश्र ने कहीं। वे बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुशीनगर के शिक्षा शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित “नारीचेतना के विविध आयाम : सशक्तिकरण के संदर्भ में” विषयक संगोष्ठी के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। प्रोफेसर मिश्र ने कहा कि श्रेष्ठता बोध समाज में विचलन पैदा करता है। पुरुष का श्रेष्ठता बोध स्त्री की खराब स्थिति का कारण है। पुरुष होने की श्रेष्ठता बोध को समाप्त करके ही स्त्री की स्थिति को सुधारा जा सकता है। द्रोपदी की परंपरा को भी आदर्श मानना चाहिए क्योंकि यह सवाल उठने की परंपरा है। जो सवाल उठाता है वह समाज को बदलने की कोशिश करता है। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रोफेसर सुषमा पाण्डेय ने कहा कि स्त्री और पुरुष दोनों के समान रूप हों तभी समाज सुंदर हो सकते हैं। स्त्री ने खुद को चहरदीवारी के अंदर की भूमिका में सीमित कर लिया इसलिए वह कमजोर होती गई। भारत के इतिहास में स्त्रियों की स्थिति पुरुष के समान थी। बाद में उसे कमजोर बनाया गया। विशिष्ट वक्ता के रूप में संगोष्ठी को संबोधित करते हुए दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि प्रागैतिहासिक काल से वैदिक काल तक स्त्रियों की सहभागिता समान थी। उत्तर वैदिक काल से मध्य काल तक स्त्री की भूमिका कमतर होने लगी। उन्होंने स्त्री को दोयम बनाने वाली स्थितियों की चर्चा की। उन्होंने निर्णय लेने वाली, विधान बनाने वाली और क्रियान्वयन करने वाली संस्थाओं में स्त्री की भूमिका को बढ़ाने की बात कही। अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो केपी सिंह ने किया। स्वागत भाषण प्रोफेसर कौस्तुभ नारायण मिश्र और संचालन शिक्षा शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ निरंकार राम त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर  प्राचार्य प्रो. ममता मणि त्रिपाठी, प्रो. वीरेंद्र कुमार, प्रो. महबूब आलम, प्रो. रेखा तिवारी, प्रो. किरन जायसवाल, , प्रो. बृजेश सिंह , प्रो. राम भूषण मिश्र, प्रो. सीमा त्रिपाठी, प्रो. अमृतांशु शुक्ल, प्रो. सत्येंद्र गौतम, डा.राकेश सोनकर आदि मौजूद थे।

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