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बौद्ध धर्म गुरू भदन्त ज्ञानेश्वर का पार्थिव शरीर हुआ पंच तत्व में विलीन 👉 अन्तिम विदाई यात्रा के दौरान शामिल हुए हजारों लोग 👉 यात्रा के दौरान जगह जगह पुष्प वर्षा के साथ लोगों ने दी श्रद्धांजलि 👉 कुशीनगर विधायक पीएन पाठक, सांसद बाबू सिंह कुशवाहा, बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया, पूर्व मंत्री स्वामीप्रसाद मौर्य, पूर्व सांसद संघमित्रा, पूर्व विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी, राधेश्याम सिंह, राजेश प्रताप राव आदि हुए शामिल।

(आलोक कुमार तिवारी)

बौद्ध धर्म गुरू भदन्त ज्ञानेश्वर का पार्थिव शरीर हुआ पंच तत्व में विलीन

👉 अन्तिम विदाई यात्रा के दौरान शामिल हुए हजारों लोग
👉 यात्रा के दौरान जगह जगह पुष्प वर्षा के साथ लोगों ने दी श्रद्धांजलि
👉 कुशीनगर विधायक पीएन पाठक, सांसद बाबू सिंह कुशवाहा, बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया, पूर्व मंत्री स्वामीप्रसाद मौर्य, पूर्व सांसद संघमित्रा, पूर्व विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी, राधेश्याम सिंह, राजेश प्रताप राव आदि हुए शामिल।

कुशीनगर । कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष रहे पूज्य गुरु भदन्त ए.बी. ज्ञानेश्वर का पार्थिव शरीर मंगलवार को कुशीनगर म्यांमार बुद्ध विहार में पंचतत्व में विलीन हो गया। बौद्ध भिक्षुओं ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए आए देश-विदेश से बौद्ध अनुयायी व गणमान्यजन उन्हें नम आंखों से विदाई दी। उनके अंतिम संस्कार में विधायक पीएन पाठक, अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य, उनकी पुत्री व पूर्व सांसद संघमित्रा, जौनपुर के सांसद बाबू सिंह कुशवाहा, सपा नेता राजेश प्रताप राव, बाराबंकी के कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया, कांग्रेस अनुसूचित प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजपाल गौतम, पूर्व सांसद कमल किशोर कमांडो सहित तमाम देश-विदेश के गणमान्य लोग शामिल हुए।
इसके पहले भदन्त ज्ञानेश्वर की म्यांमार बुद्ध विहार से अंतिम यात्रा निकाली गई। अंतिम यात्रा में जगह -जगह लोगों ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प बरसाए व श्रद्धांजलि दी। इसी क्रम में कुशीनगर मुख्य प्रवेश द्वार पर सभासद केशव सिंह व अन्य स्थानीय लोगों ने पुष्प अर्पित किया तो वही बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय के भिक्षु ज्ञानेश्वर स्मृति द्वार के सामने प्राचार्य प्रो विनोद मोहन मिश्र के नेतृत्व में महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी व छात्र छात्राओं ने भिक्षु ज्ञानेश्वर के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। दौरान बौद्ध भिक्षुओं की तरफ से उनके अंतिम यात्रा में बुद्ध वंदना के स्वर गूंज रहे थे। बता दें कि भदन्त ज्ञानेश्वर का 90 वर्ष की आयु में बीते 31 अक्टूबर 2025 को लखनऊ के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर बौद्ध भिक्षुओं व अनुयायियों के दर्शन के लिए बुद्ध विहार में रखा गया था।
इस मौके पर भंते नंदा, भंते सागरा, भंते नंदका, भंते नन्द रतन, भंते अशोक, भंते महेंद्र, भंते राजिंदा, भंते तेजवंत , भंते चश्मा, म्यांमार के राजदूत उ जा ऊं, धम्माचार्या विश्वविद्यालय के अलोद बपई के मुख्य अधिष्ठाता भिक्षु थू सी कबा बिस विन्यसा, भंते उतरानंद, भिक्षु चंदिमा सहित हजारों की संख्या में बौद्ध भिक्षुओं व उपासक- उपासिकाओ की मौजूदगी रही।

म्यांमार की गायिकाओं ने गीत के माध्यम से दी श्रद्धांजलि
कुशीनगर । कुशीनगर भिक्षु संघ के तत्वावधान में आयोजित भदन्त ज्ञानेश्वर की अंतिम संस्कार के पूर्व म्यांमार से आयी गायिकाओं ने म्यांमार की भाषा में श्रद्धांजलि गीत प्रस्तुत कर ज्ञानेश्वर को अंतिम विदाई दी। ज्ञानेश्वर की यादों व कृत्तित्व को म्यांमार की गायिका ने अपनी श्रद्धांजलि गीत में पिरोया था।

मुखाग्नि के समय छोड़े गए आकाशीय पटाखे
कुशीनगर । भदन्त ज्ञानेश्वर का अंतिम संस्कार के समय मुखाग्नि के दौरान आकाशीय पटाखे भी छोड़े गए। स्थानीय कुछ लोगों द्वारा अन्तिम विदाई के दौरान पटाखे छोड़े जाने को लेकर आपत्ति की गई परन्तु कुछ लोगों ने महान गुरू को अंतिम विदाई के समय इसे जायज माना।

गूंजता रहा बहे अश्कों की धारा, छोड़ गए साथ हमारा
कुशीनगर । अभिध्वजा महारथा गुरू भदन्त ज्ञानेश्वर की अंतिम संस्कार के पूर्व अंतिम विदाई यात्रा निकाली गयी। इस दौरान एबी ज्ञानेश्वर के पार्थिव शरीर के साथ चल रहे साउंड सिस्टम पर उनको श्रद्धांजलि प्रस्तुत करती एक गीत जिसके बोल थे “बहे अश्कों की धारा, छोड़ गए साथ हमारा-2, ऐसे ज्ञानी गुरू ज्ञानेश्वर को वन्दन बारंबार” गूंजती रही। जिसमें उनके जन्म से लेकर कुशीनगर आगमन व उनके कृत्तित्व तथा उनके निधन के बाद कि शोक वेदना बहुत ही संजीदगी से प्रस्तुत की गयी है। पूरे यात्रा के दौरान जगह जगह इसकी चर्चा बनी रही।

अंतिम संस्कार के वक्त भदन्त ज्ञानेश्वर का पैर उत्तर व सिर दक्षिण होने उठे सवाल
कुशीनगर । भदन्त ज्ञानेश्वर के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के वक्त सिर को दक्षिण व पैर को उत्तर की दिशा में रखा गया था। कुछ बौद्ध धर्म गुरुओं ने इस पर आपत्ति जताई परन्तु बाद में इसी दिशा में ही भदन्त ज्ञानेश्वर को मुखाग्नि दी गयी। बौद्ध धर्म के जानकारों का मानना है कि शव का अंतिम संस्कार के वक्त सिर उत्तर व पैर दक्षिण के तरफ रहता है।

पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में सुरक्षित व सकुशल सम्पन्न हुआ अंतिम विदाई यात्रा व अंतिम संस्कार
कुशीनगर । भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण मन्दिर से बौद्ध धर्म गुरू भदन्त ज्ञानेश्वर की निकाली गयी अंतिम विदाई यात्रा पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में सुरक्षित व सकुशल रहा। अपर पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी व सीओ कुन्दन सिंह के नेतृत्व में थानाध्यक्ष कसया अभिनव मिश्र, कुशीनगर चौकी प्रभारी सुजीत कुमार पाण्डेय व सैकड़ो पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में कुशीनगर से कसया गांधी चौक होते हुए कसया एनएच ओवर ब्रिज, रामाभार होते हुए म्यांमार बुद्ध विहार पहुंची यात्रा सुरक्षित व सकुशल सम्पन्न हुआ।

एबी ज्ञानेश्वर के अंतिम संस्कार में कुशीनगर के सभी बुद्ध विहार रहे शामिल
कुशीनगर । कुशीनगर में बौद्ध धर्म के प्रमुख गुरू रहे भदन्त ज्ञानेश्वर के अंतिम विदाई यात्रा व अंतिम संस्कार के दौरान कुशीनगर के सभी प्रमुख बुद्ध विहार व धर्मशाला शामिल रहे। मंगलवार को सुबह लगभग 10 बजे से निकाली गयी यात्रा के दौरान कुशीनगर के बिड़ला धर्मशाला, भिक्षु ज्ञानेश्वर बुद्ध विहार, तिब्बती बुद्ध विहार, श्रीलंका- जापान मैत्री बुद्ध बिहार, थाई बुद्धिष्ट मोनास्ट्री कुशीनगर, वाट कुशावदी बुद्ध विहार, श्रीलंका बुद्ध विहार, कोरिया बुद्ध विहार, धम्म ज्योति बुद्ध विहार सहित सभी बुद्ध विहार व धर्मशाला के प्रतिनिधि मंडल एबी ज्ञानेश्वर के अंतिम संस्कार व अंतिम विदाई यात्रा में शामिल हो कर उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि दिया।

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