कुशीनगर । सपहा स्थित मां खरदर स्थान मंदिर में आयोजित सात दिवसीय मानस प्रवचन में कथाव्यास प्रदीप सागर द्वारा राम वनवास तथा केवट प्रसंग का बहुत ही मार्मिक वर्णन किया गया।
इस दौरान राम-सीता, लक्ष्मण के वनवास जाने के दृश्य को देखकर श्रद्धालुओं की आंखें भर आईं। अनिता शास्त्री ने बताया कि विवाह के बाद वापस अयोध्या आने पर ग्रामवासियों द्वारा राम सीता तथा लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न की पत्नियों सहित सभी का हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया। इसी खुशी की बेला के साथ राजा दशरथ ने श्री राम के राज्याभिषेक की घोषणा की।
यह सुन केकई को उनकी मंथरा दासी ने राजा दशरथ द्वारा दिए गए दो वरदान की याद दिलाई। माता कैकई ने तत्काल राजा दशरथ से राम को 14 साल का वनवास तथा भरत को राजगद्दी का वरदान मांग लिया। जैसे ही राजा दशरथ ने ऐसे कठिन भर की मांग सुनी तो तत्काल मूर्छित हो गए, किंतु श्रीराम ने अपने राजशाही वस्त्र त्यागकर सीताजी तथा भाई लक्ष्मण के साथ वन जाने के पूर्व माता केकई तथा सभी माताओं से आशीर्वाद लेकर प्रस्थान किया।
सभी अयोध्यावासी अपने राजा राम के वन गमन का दृश्य देखकर व्याकुल होकर रो पड़े। वे सरयू तक जाने पर नदी पार नहीं कर पा रहे थे। तभी केवट का आना हुआ उसने राम जी से नदी पार करने की शर्त रखी और कहा कि मैंने सुना है कि आपने पत्थर पर पांव रखे तो वह नारी हो गई। कई मेरी नौका नारी नहीं हो जाए।
बड़ी चालाकी से भगवान राम के पांव धोकर ही अपनी नाव में बिठाकर नदी पार कराई। इससे पूर्व छठे दिन के प्रवचन का उद्घाटन नगरपालिका कुशीनगर के अध्यक्ष प्रतिनिधि राकेश जायसवाल ने किया। इस अवसर पर सूर्यनाथ यादव राधामोहन रामसेवक अनिल कुशवाहा हरेराम उमेश संदीप यादव रमेश मुराली सतीश सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।





