नालन्दा विश्वविद्यालय का पुनरुद्धार और पालि को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देना है भगवान बुद्ध को सच्ची श्रद्धांजलि
आलोक कुमार तिवारी(मो.न.9452404711)


कुशीनगर । डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ अनिर्बान गांगुली ने कहा कि भारत सरकार द्वारा नालन्दा विश्वविद्यालय का पुनरुद्धार और पालि को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देना भगवान बुद्ध को सच्ची श्रद्धांजलि है। यह बातें बुद्ध पीजी कालेज कुशीनगर में बुधवार को डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन नई दिल्ली, बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर व नेशनल एसोसिएशन ऑफ यूथ द्वारा आयोजित पालि : भारत की शास्त्रीय भाषा और बुद्ध की विरासत विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कही। गांगुली ने कहा कि भारतीय भाषाओं का स्वाभिमान व आत्मनिर्भरता आज की आवश्यकता है। पालि का सम्मान और उनका नए सिरे से अध्ययन इसी की ओर आगे बढ़ने का प्रयास है। कहाकि बुद्ध की भाषा पालि थी। इसका उद्धार बुद्ध से और भी ज्यादा जोड़ेगा। सारनाथ, बोधगया, शान्ति निकेतन और लेह के बाद इस विषय पर संगोष्ठी आयोजित है। उन्होंने 24 नवम्बर 1956 में सारनाथ में डॉ भीमराव आंबेडकर द्वारा दिये गये व्याख्यान का उल्लेख करते हुए कहा कि पालि भाषा और नालन्दा विश्वविद्यालय को तहस नहस करने का काम मुस्लिम शासकों ने किया। भदन्त आनंद कौशल्यान के कथन को बताते हुए कहा कि पालि भाषा और साहित्य आधुनिक भारतीय भाषा को ही नहीं कुछ अन्य विदेशी भाषाओं को भी प्रभावित करती है। पालि भाषा और साहित्य के लिए जीवन अर्पण करने वाले राहुल सांस्कृत्यायन महापंडित और त्रिपिटकाचार्य दोनों एक साथ कहे जाते है। मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष भदन्त महेन्द्र थेरो ने कहा कि भारत सरकार द्वारा पालि भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देकर प्रशंसनीय कार्य किया गया है। अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर ने कहा कि पालि भाषा के व्यापक प्रचार प्रसार से भारतीय संस्कृति को गहराई से समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने महाविद्यालय में अगले सत्र से पालि के अध्ययन अध्यापन की बात कही। पूर्व विधायक रजनीकान्त मणि त्रिपाठी ने पीएम द्वारा पालि को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने पर धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि पालि भाषा असाधारण भाषा है। उन्होंने कुशीनगर के निरन्तर विकास होते रहने की चर्चा की। आईपीएस संजय कुमार ने पाली भाषा को शास्त्रीय भाषा की मान्यता मिलने के पीछे निहित छः तत्वों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पालि को स्थापित करने वाले विद्वानों की चर्चा की। पालि का इतिहास, प्रासंगिकता, उपयोगिता व चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।वीरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने बौद्ध धर्म की ऐतिहासिकता, प्राचीनता, मर्म और महत्व से परिचय कराया। प्रो वीरेन्द्र कुमार ने बौद्ध धर्म और दर्शन को नए चश्मे से देखने की बात की। प्रो गौरव तिवारी ने भाषा के रूप में पालि के विविधता की चर्चा की। भिक्षुणी धम्मनैना, डॉ प्रतिभा यादव ने भी सम्बोधित किया। विशिष्ट वक्ता डॉ शिवानंद द्विवेदी ने कार्यक्रम की प्रस्ताविकी प्रस्तुत की। कार्यक्रम के संयोजक पूर्व प्राचार्य प्रो अमृतांशु कुमार शुक्ल ने कार्यक्रम संचालन किया। नेशनल एसोसिएशन ऑफ यूथ के अध्यक्ष भावेश पाण्डेय ने आभार ज्ञापित किया। इस दौरान प्रधानाचार्य उमेश उपाध्याय, राकेश जायसवाल, सतीश मणि, अनिल राव, डॉ चंद्रशेखर सिंह, प्रो आरबी मिश्र, प्रो इन्द्रासन प्रसाद, प्रो जीपी मंगलम, प्रो राजेश सिंह, प्रो सीमा त्रिपाठी, डॉ वीना कुमारी, डॉ रीना मालवीय, डॉ सत्यप्रकाश, वीरेन्द्र साहू, डॉ अनुज कुमार, कृष्ण कुमार, प्रो आरपी मिश्र, डॉ रामनवल, डॉ सौरभ द्विवेदी, डॉ सीपी सिंह आदि मौजूद रहे।





