जीवन जीने की शैली बताता है श्रीमद् भागवत
ग्राम पंचायत रहसू दुबे में पितर प्रसन्नता के लिए आयोजित श्रीमद् भागवत कथा

ए के तिवारी गोल्डेन
कुशीनगर । जिसे हम छोड़ना नहीं चाहते वो अपना है ही नहीं, जो अपना है उसे हम पहचानते ही नहीं। यह मनोदशा जीव को भ्रम मे रखती है। संसारिक जीवों की दशा को सुधार कर , संसार में रहते हुए भगवत आनंद प्राप्त करना ही जीवन की जीने शैली है।
यह बातें भागवत कथा विशेषज्ञ आचार्य विनय पांडेय ने कही। वह फाजिलनगर विकास खंड के ग्राम पंचायत रहसू दुबे में पितर प्रसन्नता के लिए आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में श्रोताओं को कथा सुना रहे थे। उन्होने कहा कि प्रेत योनि में रहकर भी तन्मयता से कथा सुनी जाए तो मोक्ष प्राप्त होता है। यही भागवत कथा का उद्देश्य है। ज्ञान वैराग्य पुष्ट हो तभी भक्ति सफल है। अन्यथा भक्ति बन्ध्या है। मुख्य यजमान पूर्व प्रधानाचार्य सोमेश्वर यादव, गुड्डू प्रधान, वसीर अहमद, नवल किशोर, छोटे , वीरेंद्र तिवारी, देवीलाल, मोनिका, रमिता आदि श्रोता उपस्थित रहे।





