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उत्तरप्रदेशकुशीनगर

प्रजापति पद प्राप्त होते ही दक्ष में उत्पन्न हो गया था घोर अहंकार : पं. पंकज 👉 तमकुही के सपही बुजुर्ग में रुद्र महायज्ञ के प्रथम दिवस की कथा में गूंजा हर-हर महादेव 👉 द्रोपदी चीरहरण प्रसंग में पं. रामअवध शुक्ल ने किया श्रीकृष्ण महिमा का भावप्रवण वर्णन

(आलोक कुमार तिवारी)

प्रजापति पद प्राप्त होते ही दक्ष में उत्पन्न हो गया था घोर अहंकार : पं. पंकज
👉 तमकुही के सपही बुजुर्ग में रुद्र महायज्ञ के प्रथम दिवस की कथा में गूंजा हर-हर महादेव
👉 द्रोपदी चीरहरण प्रसंग में पं. रामअवध शुक्ल ने किया श्रीकृष्ण महिमा का भावप्रवण वर्णन

कुशीनगर । कुशीनगर के तमकुही विकास खंड अंतर्गत सपही बुजुर्ग गांव में आयोजित रुद्र महायज्ञ के प्रथम दिन का धार्मिक वातावरण भक्तिरस से सराबोर रहा। कथा के दौरान जब प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान शिव के अपमान का प्रसंग वर्णित हुआ, तो उपस्थित श्रद्धालु भावविह्वल हो उठे।
कथावाचक पंडित पंकज कृष्ण शास्त्री ने शुक्रवार रात्रि की कथा में बताया कि प्रजापति पद प्राप्त करने के पश्चात दक्ष में घोर अहंकार उत्पन्न हो गया था। उन्होंने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें समस्त देवताओं को आमंत्रित किया गया। सभी देवता उनके सम्मान में खड़े हुए, परंतु विष्णु, ब्रह्मा और भगवान शिव यथास्थान शांत बैठे रहे। दक्ष ने विष्णु और ब्रह्मा की अनदेखी की परंतु शिव को देखकर उनका अहंकार भड़क उठा। उन्होंने शिव को भूतों का स्वामी, भस्मधारी, मुंडमाल पहनने वाला कहकर अपमानित किया। यह अपमान सुनकर भगवान शिव के वाहन नंदी क्रोधित हो उठे और दक्ष को श्राप दे डाला कि जिस मुख से तुम मेरे स्वामी का अपमान कर रहे हो, वह सिर कट जाएगा और उसकी जगह बकरे का सिर लगेगा। यह प्रसंग सुनकर कथा स्थल हर हर महादेव के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
शनिवार को दिन के सत्र में कथावाचक पं. रामअवध शुक्ल ने महाभारत के द्रोपदी चीरहरण प्रसंग का भावप्रवण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब धर्म संकट में होता है, तब भगवान श्रीकृष्ण स्वयं अधर्म के नाश हेतु अवतरित होते हैं। द्रौपदी की लाज रक्षा कर प्रभु श्रीकृष्ण ने सम्पूर्ण मानवता को यह संदेश दिया कि आस्था और आत्मसमर्पण ही ईश्वर को बाध्य कर सकती है। महायज्ञ में मुख्य यजमान त्रिभुवन सिंह, रामेश्वर कुशवाहा, प्रकाश सिंह, हरिहर खरवार और सतन पटेल, आयोजन समिति के अध्यक्ष अतुल सिंह, उपाध्यक्ष मुन्ना सिंह, कोषाध्यक्ष त्रिभुवन सिंह, उपकोषाध्यक्ष हरि सिंह, संरक्षक बच्चा सिंह नर्मदा सिंह, ओमप्रकाश सिंह, बिट्टू सिंह, सतन सिंह, कन्हैया सिंह, जितेंद्र सिंह, धनन्जय सिंह, शंभु सिंह, अजित कुशवाहा, कृष्णकांत कुशवाहा आदि उपस्थित रहे। श्रद्धा, भक्ति और शांति से ओतप्रोत इस रुद्र महायज्ञ की कथा श्रंखला प्रतिदिन शिव महिमा और धर्म संदेश से श्रोताओं के अंतर्मन को झंकृत कर रही है।

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