बौद्धों ने शरद पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा) के उपलक्ष में समारोहपूर्वक मनाया पवारणोत्सव
(आलोक कुमार तिवारी)

बौद्धों ने शरद पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा) के उपलक्ष में समारोहपूर्वक मनाया पवारणोत्सव
कुशीनगर । कुशीनगर में मंगलवार को बौद्धों ने शरद पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा) के उपलक्ष में पवारणोत्सव समारोहपूर्वक मनाया। चारिका करते बुद्ध मंदिरों से निकले बौद्ध भिक्षुओं को उपासक/उपसिकाओं ने अनेक स्थान पर संघ दान देकर पुण्यानुमोदन प्राप्त किया। प्रारंभ में महापरिनिर्वाण बुद्ध मंदिर में मानव कल्याण व विश्व शांति के लिए भिक्षुओं ने पूजा किया। म्यांमार बुद्ध मंदिर के प्रभारी भिक्षु नन्दका ने कहाकि बौद्ध धर्म में प्रत्येक पूर्णिमा महत्वपूर्ण है। वैसाख पूर्णिमा को सिद्धार्थ का जन्म, ज्ञान प्राप्ति व महापरिनिर्वाण हुआ था। शरद पूर्णिमा को भगवान बुद्ध देवलोक में जाकर अपनी माता महामाया को धम्मोपदेश दिया था। शरद पूर्णिमा (अश्विन पूर्णिमा) को भिक्षुओं का त्रैमासिक वर्षावास समाप्त होता है। इसी कारण इस उत्सव का नाम पवारणोत्सव भी कहते हैं। आज के ही दिन राजगिरि में आयोजित प्रथम धम्म संगीति का समापन हुआ था। इसलिए बौद्धों के लिए शरद -पूर्णिमा का महत्व है। संचालन तरित किशोर राय व मोरिन राय ने आभार ज्ञापित किया। इस दौरान भारतीय व विदेशी बुद्धिस्ट मोनास्ट्रीज के भिक्षु, भिक्षुणियां, उपासक व उपासिकाएं मौजूद रहे।





