आठ वर्ष बाद भी भापुस स्मारकों पर पालीथिन पाबंदी बेअसर, विभाग मौन
-आज के ही दिन 2016 को केंद्र ने लगाया था प्रतिबंध -परिसर ही नहीं बाहर तीन सौ मीटर के दायरे में भी प्रतिबंधित है प्लास्टिक/पालीथिन

आठ वर्ष बाद भी भापुस स्मारकों पर पालीथिन पाबंदी बेअसर, विभाग मौन
-आज के ही दिन 2016 को केंद्र ने लगाया था प्रतिबंध
-परिसर ही नहीं बाहर तीन सौ मीटर के दायरे में भी प्रतिबंधित है प्लास्टिक/पालीथिन
कुशीनगर । अंतरराष्ट्रीय पर्यटक केंद्र कुशीनगर में ऐतिहासिक स्मारक परिसर व उसके तीन सौ मीटर दायरे में पालीथिन पर लगा पाबंदी बेअसर है और विभाग मौन है। केंद्र सरकार ने स्मारकों को पालीथिन के प्रदूषण से बचाने के लिए दो अक्टूबर 2016 को पाबंदी लगाई थी। बाबजूद इसके महापरिनिर्वाण बुद्ध मंदिर, माथा कुंवर बुद्ध मंदिर और रामाभार स्तूप के तीन सौ मीटर के दायरे में पालीथिन का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। ऐतिहासिक धरोहरों को खतरनाक प्लास्टिक के प्रदूषण से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा की अध्यक्षता में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों की 28 सितंबर 2016 को हुई बैठक में पुरातात्विक पर्यटक स्थलों और स्मारकों में दो अक्टूबर 2016 से पालीथिन पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था। इसके तहत परिसर ही नहीं इसके बाहर तीन सौ मीटर के दायरे में भी प्लास्टिक और पालीथिन के प्रयोग पर पाबंदी है। इसमें प्लास्टिक में पैक चिप्स, कुरकुरे से लेकर इस तरह के पैक में आने वाले सभी खाद्य और पेय पदार्थ शामिल हैं। इसका उल्लंघन करने वाले लोगों पर जुर्माने का भी प्रावधान है। बावजूद इसके भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सीमा के तीन सौ मीटर के अंदर प्लास्टिक का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है और प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। कुशीनगर में इस नियम का पालन न होने से प्लास्टिक से प्रदूषण बढ़ रहा है। कालांतर में इसकी चपेट में ऐतिहासिक धरोहर भी आ सकते हैं। भापुस उप अंचल कुशीनगर के संरक्षण सहायक शादाब खान ने कहा कि बुद्ध मंदिर परिसर में प्लास्टिक/पालीथिन का प्रयोग पूर्णतया वर्जित है। इससे उत्तपन्न प्रदूषण ऐतिहासिक स्मारकों के लिए घातक है। इसके बाहर तीन सौ मीटर के दायरे में इसका प्रयोग नहीं करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है।





