तीन दशक से स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे टैक्सी चालक जैदुल्लाह
- निस्वार्थ भाव से तीन दशक से कर रहे अनवरत पर्यावरण संरक्षण व सफाई

तीन दशक से स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे टैक्सी चालक जैदुल्लाह
– निस्वार्थ भाव से तीन दशक से कर रहे अनवरत पर्यावरण संरक्षण व सफाई
(डीके मिश्र/आलोक कुमार तिवारी)

कुशीनगर । अगर आप मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के बनरहा रेग्युलटर पर खड़े होते हैं तो नहर की पटरी पर लगी विभिन्न प्रजाति की फूल पत्तियां, फूलदार, छायादार व फलदार वृक्ष आपको बरबस आकर्षित कर लेते हैं। यहां पर्यावरण स्वच्छ व वातावरण सुरम्य तो है ही, रेग्यूलेटर से नहर की पटरी होकर बनरहा पूरब पट्टी गांव को जाने वाला रास्ता एकदम साफ सुथरा नजर आता है। यह स्थिति तीन दशकों से है। यह उक्त गांव निवासी जैदुल्लाह अली के निस्वार्थ भाव से अनवरत पर्यावरण संरक्षण व सफाई का परिणाम है। इनसे प्रेरणा लेकर कई ग्रामीण पर्यावरण संरक्षण में जुटे हैं तो वन विभाग भी इन्हें ब्रांड एम्बेसडर बनाने की तैयारी में है।
बनरहा रेग्यूलेटर से पडरौना तक टैक्सी जीप चलाने वाले
जैदुल्लाह बताते हैं कि इस स्टैंड से गाड़ियां नंबर से चलती हैं। गाड़ी का नंबर आने व सवारी भरने तक बहुत समय होता है। वर्ष 1993 में इस समय को सार्थक करने के लिए रेग्युलटर के दोनो तरफ गंडक नहर की पटरी पर सौ मीटर के दायरे में फूल पत्तियां लगाने लगे। इन्हें रोज समय देते तो उचित देखभाल से फूल पौधे लहलहा उठे। देखकर लोगों ने तारीफ की तो एक किमी लंबाई में नहर की पटरी पर अपने संसाधन से फूलदार, फलदार व छायादार पौधरोपण कर डाला। वे अपनी जीप लेकर महानगरों में जाते हैं तो वहां बिकने वाली विभिन्न प्रजातियों के पौधे अपने पैसे से खरीदकर लाते हैं और नहर की पटरी पर लगा देते हैं। तीन सौ मीटर में लगे तीस वर्ष की उम्र के सौ अशोक के शोभादार पौधे जैदुल्लाह के पर्यावरण संरक्षण की गाथा गा रहे हैं तो नहर की सार्वजनिक भूमि में लगे आम, लीची, जामुन व अमरुद आदि के वृक्ष अपने फलों से लोगों को तृप्त करते हैं।
“जैदुल्लाह के बारे में जानकारी मिली है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति इनका लगाव प्रेरणादायक है। उच्चाधिकारियों को इनके कार्य के बारे में अवगत कराया जा रहा है। इन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाने के लिए प्रयास किया जाएगा।” हरिकेश वहादुर नायक, क्षेत्रीय वनाधिकारी, तमकुही रेंज
जैदुल्लाह की दिनचर्या यह है कि प्रतिदिन तड़के तीन बजे बिस्तर छोड़ देते हैं, नित्यकर्म से निवृत्त होने के बाद झाड़ू उठाकर गांव से बनरहा रेग्यूलेटर तक सफाई करते हैं। फिर नहा धोकर अपनी गाड़ी स्टैंड पर लगाकर नंबर आने व सवारी भरने तक फूल-पत्ते व पेड़-पौधों की सेवा में लग जाते हैं। गाड़ी जब पडरौना से लौटकर आती है तो फिर अपने कार्य में जुट जाते हैं। गाड़ी में ही खुरपी, हंसुआ, कुदाल, पौधों के लिए दवाएं इत्यादि मौजूद रहती हैं। इस पर्यावरण संरक्षण व सफाई कार्य में आने वाले समस्त खर्च का वहन जैदुल्लाह स्वयं करते हैं और आज तक किसी कोई मदद नहीं ली है। विकास, अनूप, राकेश, रविकिशन आदि लोग इनके पर्यावरण संरक्षण व सफाई कार्य से प्रेरणा लेते हैं।





