बच्चों के अधिकारों व बचपन को छीन लेता है बाल विवाह
बाल विवाह मुक्त भारत विषयक संगोष्ठी

कुशीनगर । मुख्य अतिथि ओमकार नाथ त्रिपाठी ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है जो बच्चों के अधिकारों व उनके बचपन को छीन लेता है। 2019 से 2021 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार 20 से 24 वर्ष की आयु के बीच की लगभग 24 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष की कानूनी उम्र से पहले ही हो जाती है। यह गम्भीर चिंता का विषय है। इसपर तत्काल कार्यवाही करने की आवश्यकता है। उक्त बातें नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन के सहयोग से कार्यरत सर्वहितकारी सेवाश्रम के तत्वावधान में गुरुवार को श्रीलक्ष्मी पैलेस कुशीनगर में आयोजित बाल विवाह मुक्त भारत विषयक संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा। संस्था के अध्यक्ष विनोद कुमार तिवारी ने बताया कि संस्था जनपद के तीन ब्लॉकों खड्डा ,नेबुआ नौरंगिया व कप्तानगंज में कार्य कर रही है। बृजेश चतुर्वेदी ने बाल विवाह , बाल तस्करी व बाल श्रम का सबसे बड़ा कारण गरीबी व अशिक्षा बताया। इस अभियान से अनेक सामाजिक बुराइयों को समाप्त किया जा सकता है। इसकी लिए हमें बच्चों की शिक्षा पर जोर देना होगा। कार्यक्रम समन्वयक विजय प्रताप ने अतिथियों का स्वागत किया। सोनू वर्मा , रामप्रकाश पाण्डेय, नंदलाल गुप्त, लोकेश पाण्डेय, कुँवर महादेव सिंह, ओबी अंसारी मौजूद रहे।





