रामकथा के श्रवण से अज्ञान, अहंकार और मोह का होता है नाश : अंजलि द्विवेदी 👉 नौ दिवसीय श्री रामकथा अमृत वर्षा व अखंड हरिकीर्तन का प्रथम दिन 👉 याज्ञवल्क्य-भारद्वाज प्रसंग का किया वर्णन
(आलोक कुमार तिवारी)

रामकथा के श्रवण से अज्ञान, अहंकार और मोह का होता है नाश : अंजलि द्विवेदी
👉 नौ दिवसीय श्री रामकथा अमृत वर्षा व अखंड हरिकीर्तन का प्रथम दिन
👉 याज्ञवल्क्य-भारद्वाज प्रसंग का किया वर्णन
कुशीनगर । तमकुही के पगरा पड़री के बसंतपुर स्थित ब्रह्मस्थान परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्री रामकथा अमृत वर्षा व अखंड हरिकीर्तन के प्रथम दिन सोमवार की रात्रि कथावाचिका अंजलि द्विवेदी ने रामकथा के माध्यम से जीवन के अज्ञान और अहंकार के नाश की महत्ता को रेखांकित किया।कथावाचिका ने याज्ञवल्क्य-भारद्वाज प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि याज्ञवल्क्य के उपदेश से भारद्वाज का मन आलोकित हुआ और वह अपने अज्ञान से मुक्त हुआ। इसी प्रकार, रामकथा का श्रवण भी व्यक्ति के अज्ञान, मोह और भ्रांतियों का नाश करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कथा का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ज्ञान, भक्ति और नैतिक मूल्यों की प्राप्ति है।
याज्ञवल्क्य-भारद्वाज संवाद से यह स्पष्ट होता है कि ज्ञान की प्राप्ति और आत्मशुद्धि के लिए रामकथा का श्रवण अनिवार्य है। कथावाचिका ने रामकथा के माध्यम से जीवन के विविध पक्षों, जैसे धर्म, नीति, परस्पर सौहार्द और सच्चे भक्ति भाव को सहज और रोचक शैली में प्रस्तुत किया।
श्रद्धालुओं ने प्रसंग को ध्यानपूर्वक सुना और उसके आध्यात्मिक संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। इस दौरान राजकिशोर गोंड, गुड्डू गोंड, महातम प्रसाद कुशवाहा, पारसनाथ पांडेय, चिंटू सिंह, नगनारायण सिंह, अमरनाथ प्रजापति, अभिमन्यु, अंकित गोंड, रमेश यादव आदि उपस्थित रहे।





