राम वनगमन की कथा सुन श्रद्धालुओं की आंखें हुई नम
- पांच दिवसीय रामकथा का तीसरा चौथा दिन - गायत्री परिवार द्वारा किया गया दीपयज्ञ

राम वनगमन की कथा सुन श्रद्धालुओं की आंखें हुई नम
– पांच दिवसीय रामकथा का तीसरा चौथा दिन
– गायत्री परिवार द्वारा किया गया दीपयज्
दुदही विकास खंड के ग्राम पंचायत मठिया भोकरिया के पंचायत भवन परिसर में नारायणी सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय रामकथा के चौथे दिन अयोध्या से पधारी कथावाचिका धर्मरक्षिता शास्त्री ने राम वनगमन की कथा सुनाई। जिसे सुन श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं।
कथावाचिका ने कहा कि कैकेई के वरदान के क्रम में पिता की आज्ञा पाकर भगवान राम ने जब भाई लक्ष्मण व पत्नी सीता के साथ वन के लिए प्रस्थान किया तो पूरी अयोध्या नगरी उनके पीछे-पीछे चल पड़ी। जिन्हें राम ने वापस किया। जब भगवान राम गंगा नदी पार करने के लिए उसके तट पर पहुंचे तो यह खबर सुनते ही निषाद राज गुह्य खुशी से फूले नही समाए। उन्हें नदी के पार उतारा। जब भगवान राम उतराई के तौर पर निषाद को मां सीता की अंगूठी देने लगे तो निषाद राज ने कहा कि हे भगवान जिस तरह मैने आपको नैया से गंगा के इस पार उतारा है, उसी प्रकार आप मेरी भी नैया को भवसागर से उस पार लगा लेना। इधर पुत्र विक्षोह से व्याकुल होकर राजा दशरथ ने अपने प्राणों का परित्याग कर दिया। रामवन गमन की कथा सुन श्रद्धालुओं की आंखे भर आईं।
कथा का शुभारंभ करते मुख्य अतिथि देवरिया सदर के विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने कहा कि भगवान राम जैसा चरित्र इस संसार में पैदा नहीं हुआ। वह परम उदार, दयालु और मार्ग दर्शक हैं। भगवान राम का नाम उनसे बड़ा है। उनके नाम में इतनी शक्ति है कि अगर सच्ची भक्ति और निष्ठा से पत्थर पर लिखने से पानी तैरने लगता है। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहे जाते हैं।
चौथे दिन गायत्री परिवार द्वारा शाम को दीपयज्ञ भी किया गया। विशिष्ट अतिथि पूर्व प्रमुख गिरिजेश जायसवाल व पत्रकार कुंदन मिश्र रहे।संयोजक शिक्षक अरूणेन्द्र राय, आरएसएस खंड प्रचार प्रमुख प्रवीण कुमार राय, पूर्व शिक्षक मंत्री अभिमन्यु प्रसाद, बीडीसी अनवर अंसारी, अजय राय, तुलानरायण राय, योगेन्द्र राय, इन्द्रजीत राय, सुनील कुमार श्रीवास्तव, केदारनाथ सिंह, पत्रकार रवीश मद्धेशिया, डा. मुरारी शरण जायसवाल, रामएकबाल राय आदि मौजूद रहे।





