
असफलता जीवन का अंत नहीं बल्कि एक नए अध्याय का है आरम्भ
कुशीनगर । बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा शुक्रवार को विश्व स्वस्थ्य दिवस के अवसर पर “मन रंजन से विरेचन तक” उक्त विषयक एक दृश्य श्रव्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया| कार्यक्रम में मनोविज्ञान के विद्यार्थियों ने मानसिक स्वस्थ्य के भिन्न भिन्न पक्षों को उजागर करती हुई नाट्य प्रस्तुतियां दी| इन प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों ने मानसिक समस्या के लक्षणों, कारण और निवारण का चित्रण कर इनके प्रति समाज में जागरूकता उत्पन्न करने का प्रयास किया| भंवर, ख़ामोशी, पिंजरा, अँधेरे में रौशनी, जाहिर, कल की परछाईं, छोटी सी बात आदि प्रतुतियाँ दीं|, जिसमें अवसाद , चिंता, तनाव , आदि समस्याओं का भूमिकाओं के माध्यम से चित्रण किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो विनोद मोहन मिश्र में विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं पर बात करने के लिए प्रेरित किया| उन्होंने कहा की असफलता जीवन का अंत नहीं बल्कि एक नए अध्याय का आरम्भ है| असफलता सिर्फ यह बताती है की आपको अपना दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है | प्राचार्य जी ने आस पास घटित घटनाओं के माध्यम से समाज में फैली मानसिक समस्याओ की और ध्यान आकर्षित किया और बताया की यदि समाज जागरूक जाए तो बहुत सी ज़िंदगियाँ बच जाएंगी| विषय प्रवर्तन करते हुए पूर्व प्राचार्य प्रो अमृतांशु शुक्ल ने विरेचन की पृष्ठभूमि को बताया| उन्होंने भारतीय दर्शन में विरेचन की व्याख्या के साथ ही प्लेटो और उनके शिष्य अरस्तु की विरेचन की धारणा को भी समझाया | प्रो शुक्ल ने यह भी बताया की फ्रायड ने भी विरेचन की बात कही थी किन्तु उनका विरेचन अलग था | प्रो शुक्ल ने इस वर्ष की मानसिक दिवस की थीम “एक्सेस टू सर्विसेज – मेन्टल हेल्थ इन कटस्ट्रोफिज़ एंड एमर्जेन्सीज़ की भी विस्तारपूर्वक चर्चा की | ” अतिथियों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो रामभूषण मिश्र ने मानसिक स्वस्थ्य दिवस के प्रयोजन पर प्रकाश डाला| संचालन एम ए द्वितीय वर्ष के छात्र शमशुद्दीन अंसारी ने तथा धन्यवाद डॉ सत्यप्रकाश ने किया। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किया गया। कार्यक्रम में प्रो राजेश सिंह, प्रो सीमा त्रिपाठी, प्रो गौरव तिवारी , डॉ रीना मालवीय , डॉ वीणा ,डॉ राकेश सोनकर ,डॉ विशेषता मिश्रा, डॉ वीरेंदर ,डॉ अनुज कुमार ,डॉ सुभाष चंद्र , डॉ के के जायसवाल , डॉ रमेश विश्वकर्मा आदि शिक्षकों के साथ बड़ी संख्या में छात्र छात्र भी उपस्थित रहे





