श्रीकृष्ण की कृपा से बची द्रौपदी की लाज, धर्म की हुई विजय 👉 सुनाया चीरहरण प्रसंग तो श्रोताओं की आंखें हुई नम 👉 अन्याय पर आस्था व धर्म की जीत का दिया संदेश
(आलोक कुमार तिवारी)

श्रीकृष्ण की कृपा से बची द्रौपदी की लाज, धर्म की हुई विजय
👉 सुनाया चीरहरण प्रसंग तो श्रोताओं की आंखें हुई नम
👉 अन्याय पर आस्था व धर्म की जीत का दिया संदेश

कुशीनगर । तमकुही विकास खंड के ग्राम पंचायत पगरा पड़री के बसंतपुर टोला स्थित ब्रह्मस्थान परिसर में चल रहे नौ दिवसीय श्रीरामकथा अमृत वर्षा व अखंड हरिकीर्तन के छठवें दिन शनिवार की रात्रि कथावाचिका अंजलि द्विवेदी ने द्रौपदी चीरहरण प्रसंग सुनाया। उनके भावपूर्ण वर्णन से वातावरण भक्ति व करुणा से भर उठा।
कथावाचिका ने कहा कि द्यूतसभा में पांडवों के पराजय के बाद जब द्रौपदी को बुलाया गया, तो उसने धर्मसभा में प्रश्न किया कि जो स्वयं दांव पर हार चुका, वह अपनी पत्नी को कैसे दांव पर लगा सकता है। सभा मौन रही। दुर्योधन के इशारे पर दुःशासन ने उसे अपमानित करने का प्रयास किया। जब न्याय के सभी द्वार बंद हो गए, तब द्रौपदी ने दोनों हाथ उठाकर भगवान श्रीकृष्ण को पुकारा। श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से वस्त्रों की अखंड धारा प्रवाहित कर दी। दुःशासन जितना खींचता गया, वस्त्र उतने बढ़ते गए। अंततः वह थककर गिर पड़ा व सभा में धर्म की पुनर्स्थापना हुई। इस दैवीय चमत्कार से सभा में उपस्थित भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य सहित सभी महापुरुष नतमस्तक हो गए। कथावाचिका ने कहा कि यह प्रसंग बताता है कि जब अन्याय चरम पर होता है, तब ईश्वर स्वयं धर्म की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। श्रीकृष्ण की यह कृपा न केवल द्रौपदी की लाज की रक्षा थी, बल्कि श्रद्धा, सत्य व धर्म की विजय का भी प्रतीक थी। इस दौरान राजकिशोर प्रसाद, नगनारायण सिंह, मनोरंजन शाही, महातम कुशवाहा, सुदामा गुप्ता, अनिरुद्ध सिंह, अमरनाथ प्रजापति, बैजू सिंह, छोटे सिंह, राजेश पांडेय, अभिमन्यु पांडेय, कामोद सिंह, श्रीराम गोंड, आदित्य कुमार, सोनू कुशवाहा, अंकित गोंड, अभिमन्यु कुशवाहा, चिंटू सिंह, विजय गोंड, निरंजन, गुड्डू गोंड, राजन गोंड, राहुल, सतीश गोंड आदि उपस्थित रहे।





